पाकिस्तान में 1971 जैसे हालात बनने के संकेत, भविष्य में नक्शे से भी गायब हो सकता है देश: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता

Signs of a 1971-like situation emerging in Pakistan

Signs of a 1971-like situation emerging in Pakistan

शिमला। Signs of a 1971-like situation emerging in Pakistan, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर में उभर रहे हालात पर कहा है कि पाकिस्तान में 1971 जैसे हालात दोबारा बन रहे हैं। आने वाले समय में ऐसा भी हो सकता है कि पाकिस्तान विश्व के नक्शे पर दिखाई न दे। राज्यपाल ने शिमला में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पाक अधिकृत कश्मीर के लोग लगातार अपने अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।

1947 के विभाजन के बाद से पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर के लोग भारतीय कश्मीर की तुलना में खुद को उपेक्षित महसूस करते हैं, जिससे वहां असंतोष बढ़ रहा है। कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के प्रशासनिक दृष्टिकोण में बड़ा अंतर है। जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और यहां लोगों के साथ इस प्रकार का व्यवहार नहीं किया जाता।

सिविक सेंस और संस्कारों पर जोर देना होगा

शिमला में गंदगी पर विदेशी महिला के प्रसारित वीडियो पर राज्यपाल ने कहा कि सिविक सेंस और संस्कारों पर जोर देना होगा। राज्यपाल ने कहा, पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकट के बावजूद भारत ने अपनी मजबूत कूटनीति और संतुलित विदेश नीति के दम पर स्थिति को प्रभावी ढंग से संभाला है।

लघुचित्र प्रदर्शनी कला दीर्घा का उद्घाटन किया

इससे पहले राज्यपाल ने शुक्रवार को भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में कांगड़ा लघुचित्रों की प्रदर्शनी एवं नवस्थापित कला दीर्घा का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि किसी भी सभ्यता की पहचान उसकी आर्थिक समृद्धि से नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक गुणवत्ता, रचनात्मक चेतना और विरासत के प्रति सम्मान से होती है। उन्होंने इसे भारत की जीवंत सांस्कृतिक विरासत का उत्सव बताया। यह पहाड़ी चित्रकला शैली राजा संसार चंद के संरक्षण में अपने उत्कर्ष पर पहुंची। 

भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रोफेसर हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि यह कला शिविर अकादमिक विमर्श और जीवंत कला परंपराओं के मध्य संवाद स्थापित करने का अभिनव प्रयास है। शिविर में छह प्रतिष्ठित कांगड़ा लघुचित्र कलाकारों और दो वरिष्ठ चंबा रुमाल कलाकारों ने भाग लिया। निर्मित कलाकृतियां संस्थान के स्थायी संग्रह का हिस्सा बनेंगी, जिससे शोधार्थियों और पर्यटकों को हिमालयी कला परंपराओं से परिचित होने का अवसर मिलेगा।